सत्यपाल कुमार संवादाता सौर बाजार/सहरसा
प्रखंड क्षेत्र में गोवर्धन पूजा यानी गाय और भगवान श्री कृष्ण की पूजा किया गया। इसके साथ ही वरुण देव इंद्रदेव और अग्नि देव आदि देवताओं की पूजा भी किया गया। बताया जाता है की दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा मनाया जाता है। लेकिन अबकी बार दीपावली के तीसरे दिन गोवर्धन पूजा मनाया गया। भगवान कृष्ण के अवतार के बाद गोवर्धन पूजा मानने लगे।गोवर्धन पूजा के दिन गाय को स्नान कर उसकी पूजा कर आरती उतार कर उसी गाय के दूध से मिठाई बनाकर श्री कृष्ण को भोग लगाया जाता है।
गायों को हरा चारा गुड़ इत्यादि खिलाया जाता तथा सुख समृद्धि की कामना की जाती है और सभी गायों को श्रृंगार भी किया जाता है। गौ पालक नगर पंचायत सौर बाजार वार्ड नंबर 02 निवासी रामविलास यादव, कैलाश यादव, अजय यादव ने बताया कि यह पूजा जब ग्रामीण वज्रवासी की पूजा करते थे तो भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की जगह गोवर्धन पूजा करने के बात कहीं तो इंद्र रूष्ट हो गए। और उन्होंने अपना प्रभाव दिखाते हुए ब्रजमंडल में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी इसी वर्षा से ग्रामीणों को बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया और ब्रज से ग्राम वासियों की रक्षा की। गोवर्धन पर्वत के नीचे दिन तक सभी ग्रामीणों के साथ गोपिया उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे। फिर ब्रह्मा जी ने इंद्र बताया कि पृथ्वी पर विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप में जन्म लिया और उसी ने अपने बैर लेना उचित नहीं है यह जानकर इंद्र देव ने भगवान श्री कृष्ण से क्षमा याचना की। भगवान श्री कष्ण सातवें दिन गोवर्धन पर्वतों को नीचे रखा इसके बाद भगवान कृष्ण गोवर्धन पूजा के 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का भी आदेश दिया था।



